
-08/02/2026
विषय-अब और क्या बाकी बताना रह गया।
विधा-काव्यमाना कि हसीन गुलाब नहीं हूं मैं, औरों की तरह।पर मेरी चाहत की गहराई को तू महसूस कर ज़रा।आँखों में छुपे हैं बस ख़्वाब तुम्हारे,कैसे तुम्हें बताए?हया के मारे,हाले दिल अपना सनम,कैसे तुझे सुनाए?बातों पर यकीन ना सही,मेरी आँखों में झांक लें।दुनिया में कोई पैमाना नहीं,जो उल्फत को माप लें।ज़माने में मौजूद होकर भी वजूद मेरा, बेगाना हो गया?अधूरापन तेरे बिना,अब और क्या बाकी बताना रह गया।स्वरचित -शिखा पाण्डेय, गोरखपुर उत्तर प्रदेश, भारत।सदस्यता क्रमांक -1577
