अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाएँ

 

 

=======================
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाऍं
=======================
सृष्टि सृजक संचालन करते,
शिव शंकर अद्भूत महायोग।
भ्रूण में सूक्ष्म जीव अवतरण,
कैसा है चमत्कारिक संयोग।।

जलचर,थलचर,नभचर सब,
अलग-अलग रखें मनोयोग।
जाने अंजाने सकल चराचर,
योग से ही स्वीकारते भोग।।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का,
आज हो रहा है खूब हल्ला।
समूह में योग लगे रौनक हैं,
शहर-गाॅंव व गली-मोहल्ला।।

योग तो बस निरंतर प्रक्रिया,
प्राणायाम से ही स्वस्थ धमनी।
फिर क्यों प्रदूषण फैला रहें,
विषाक्त गैस उगलती चिमनी।।

एकतरफा भौतिक विकास,
दूजे प्राकृतिक संपदा विनाश।
बिमारी को आमंत्रित करते,
स्वयं ही कर रहे हैं सत्यानाश।।

योग हो वैचारिक संतुलन के,
सर्वदा छल-कपट-प्रपंच मुक्त।
जैसे शिव कैलाश धुनि रमाये,
मर्यादा पुरुषोत्तम से योगयुक्त।।

प्राकृतिक संचित को न खोऍं,
सदा शुद्धता के आचरण बोऍं।
पर्यावरण संरक्षण-संवर्धन व,
मिलावट मुक्त भोजन संजोऍं।।

ज्ञान योग से शारीरिक रोग के,
गुरु मंत्र ही सीखें और सिखाऍं।
संकल्प लें विष नहीं घोलेंगे व,
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाऍं।।
=======================
स्वरचित मौलिक रचना संग
सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यार्थी”
हथखोज/ देमार (पाटन)
तालपुरी भिलाई छत्तीसगढ़
=======================

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!