
विषय-शौक़ को ज़िंदा रखें,जीवन में खुशियों भरें।
शीर्षक :नर हो, निराश न हो
नर हो, निराश न हो, जीवन में उजियारा है,
हर अँधियारे के पीछे, सूरज का किनारा है।
शौक अगर जिंदा रहें, मन सदा मुस्काता है,
सूखी राहों पर भी फिर, खुशियों का फव्वारा है।
थककर मत बैठो तुम, पथ अभी सुहाना है,
छोटे-छोटे सपनों से, जीवन को सजाना है।
रंग भरो अभिलाषा में, हौसलों की ज्योति जलाओ,
मन की वीणा छेड़ो, अपना गीत सुनाना है।
जब भी समय सताए, उम्मीद का दीप जलाओ,
अपने प्रिय शौकों से, मन को फिर महकाओ।
चित्र बनाओ, गीत रचो, शब्दों से जग सजाओ,
इनसे ही जीवन में, खुशियों के फूल खिलाओ।
नर हो, निराश न हो, हर पल नया सवेरा है,
संघर्षों की धरती पर, सपनों का बसेरा है।
शौक ही जीवन की सच्ची मुस्कान बनाते हैं,
इनसे ही हर दिल में, आनंद का डेरा है।
चलो बढ़ो आगे तुम, विश्वास को साथी कर,
अपने हर छोटे प्रयास को उत्सव की थाती कर।
शौक को जिंदा रखोगे तो जीवन हँसता रहेगा,
हर दिन को खुशियों से भर, अपनी कहानी रचते रहो।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार
