लिखना

लिखना———————————–कभी कभी लिखना स्वयं के लिए पुरस्कार से कम नहीं ।क्या लिखना है….क्यों लिखना है……पर लिखना भी एक कला है ।कोई करे टिप्पणी…कोई करे समीक्षा…कोई करे आलोचना ….तो…कोई सीधे दे…

प्रेम

  प्रेम ———————————————————————— जिस “ताजमहल” को सारी दुनिया मानती प्रेम की निशानी, वो ताजमहल कितना सुन्दर, सफेद संगमरमर में बना, प्रेम की अद्वितीय निशानी, शाहजहां को इतना “प्रेम” था, अपनी…

शीर्षकयह कैसी ज़िंदगी

  शीर्षक यह कैसी ज़िंदगी “सावली, तैयार हो गई?” माँ ने रसोईघर से आवाज़ लगाई। स्कूल के लिए बस पकड़नी है, टिफ़िन तैयार करना है, बाल बनाने हैं, फिर बस-स्टॉप…

शीर्षक यह कैसी ज़िंदगी

शीर्षक  यह कैसी ज़िंदगी     “सावली, तैयार हो गई?” माँ ने रसोईघर से आवाज़ लगाई।   स्कूल के लिए बस पकड़नी है, टिफ़िन तैयार करना है, बाल बनाने हैं,…

विश्व जनसंख्या दिवस पर एक

नमन मंच  दिनांक 11.7.26 विश्व जनसंख्या दिवस पर एक लघुकथा शीर्षक              बिरादरी की सोच   राजू आटोवाला आते ही सीमा तेजी से बाहर आ…

वैश्विक जनसंख्या नियंत्रण चाहिए

अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रणदिवस विशेष 11/07/2026=======================वैश्विक जनसंख्या नियंत्रण चाहिए=======================क्या विश्व में बेरोजगारी,अधिकार,और घर-घर लड़ाई होना चाहिए?क्या ये बढ़ती जनसंख्या विस्फोट,सबके सामंजस्य से रोकना चाहिए? बढ़ती जनसंख्या नियंत्रण अवश्य,एक श्रेष्ठ सशक्त दृष्टिकोण…

चलो मिलकर योग करें

  चलो मिलकर योग करें चलो मिलकर योग करें,अपने शरीर निरोग करें।योग है एक वरदान,इसका हम उपयोग करें। अपनी संस्कृति का मान करें,प्रकृति का सम्मान करें।शांत वातावरण में बैठकर,नित्य ही…

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाएँ

    =======================अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाऍं=======================सृष्टि सृजक संचालन करते,शिव शंकर अद्भूत महायोग।भ्रूण में सूक्ष्म जीव अवतरण,कैसा है चमत्कारिक संयोग।। जलचर,थलचर,नभचर सब,अलग-अलग रखें मनोयोग।जाने अंजाने सकल चराचर,योग से ही स्वीकारते भोग।।…

आनन्दमय जीवन

  दिनांक 18.6.26शीर्षक आनन्दमय जीवन योग जीवन जीने कासफल विज्ञान।बस आधे घंटे का योग कर देता कमाल।दैनिक जीवन में संतुलन सिखाता है योग।बीमारियों से चिन्तामुक्त कर देता है योग।सूक्ष्म व्यायाम…

वृद्धाश्रम बढ़ते क्यों जा रहे हैं?

  वृद्धाश्रम बढ़ते क्यों जा रहे हैं? शीर्षक:-काँच की किनकियाँ और सूने आँगन तरक़्क़ी की हवाओं में यह कैसा दौर आया है,मकानों को तो बड़ा किया, पर दिलों को छोटा…

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